पंचायत चुनाव में आरक्षण चक्र की सरगर्मी हुई तेज, चुनावी मैदान में आने वाले उम्मीदवारों की हो रही चर्चा

नेशनल आवाज़ /बक्सर :- जिले के सभी पंचायतों में लगभग छह महीने बाद 2026 में ही त्रिस्तरीय पंचायत आम चुनाव कराया जाएगा. जिस पंचायत चुनाव में सभी आरक्षित कोटि के पदों के चक्र में बदलाव होगा. पिछले दो चुनाव में जिन पदों पर जिस कोटि के प्रत्याशियों को आरक्षण का लाभ दिया गया था. अब वहां पर आरक्षण का चक्र बदल जाएगा.
जिसकी आहट अभी से ही पंचायत में दिखने लगी है.पहले से आरक्षण रोस्टर को देखते हुए पंचायत प्रतिनिधियों ने अपने हिसाब से वहां आकलन कर चुनावी मैदान में आने के लिए संभावना जताना शुरू कर दिया है.जिसके लिए गांव के सभी चौक चौराहे पर होली से पूर्व ही बैनर पोस्ट से रंग गया है.
त्रिस्तरीय पंचायत आम चुनाव में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अत्यंत पिछड़ा वर्ग और महिलाओं को अधिकतम 50% आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है.राज्य में होने वाले पंचायत चुनाव में तीसरी बार आरक्षण के चक्र में बदलाव होगा.
पंचायत राज अधिनियम में प्रावधान है कि लगातार दो आम चुनाव के बाद आरक्षण का चक्र बदल जाएगा.जिसकी चर्चा लोगों में खूब हो रही है. सबसे बड़ी बात है की कुछ ऐसे पंचायत है. जहां आज तक आरक्षण का चक्र नहीं बदला है. इस बार भी यहां अपने पद पर आसीन प्रतिनिधि का दावा कर रहे है की इस बार भी कुर्सी हमारी होगी. जिसमें सामान्य सीटों पर काफ़ी चर्चा है.
वर्ष 2006 में पहली बार सभी पदों का आरक्षण किया गया था. जिसका चक्र 2011 के आम चुनाव में समाप्त हो गया. वर्ष 2016 और 2021 के पंचायत आम चुनाव में एक पद पर लगातार दो बार जिस कोटि के प्रत्याशियों के लिए आरक्षित किया गया था. त्रिस्तरीय पंचायत में पदों का आरक्षण अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को उसकी जनसंख्या के अनुपात में दिया जाता है. अगर किसी निर्वाचन क्षेत्र में अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की आबादी 25% है तो वहां उस कोटि के पदों का आरक्षण भी 25% होगा. शेष पदों में अत्यंत पिछड़ा वर्ग के प्रत्याशियों को 20% के निकट होगी. ग्रामीणों में यह चर्चा है कि इस बार अगर सामान्य कोटि की सीटों किसी दूसरे आरक्षित कोटे में जाता है तो वहां का चुनावी समीकरण भी बदल सकता है.






