प्रसव के दौरान महिला की हुई मौत पर परिजनों ने किया हंगामा,चिकित्सक हुए फरार


नेशनल आवाज़ /बक्सर :- नगर थाना क्षेत्र के नया बाजार में एक निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान एक 24 वर्षीय महिला की मौत हो गई. जिसकी पहचान गुड़िया देवी पति मनोज कुमार राम के रूप में हुई है.मनोज ने बताया की विगत 1 जनवरी को उनकी पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर सदर अस्पताल में भर्ती कराया था. एक दिन इलाज के बाद भी हालत में सुधार नहीं हुआ.सदर अस्पताल के इलाज और रवैये से क्षुब्ध होकर उनकी पत्नी बाहर प्रसव कराने की जिद की.साथ में आशा कार्यकर्ता की सलाह पर शनिवार की सुबह पत्नी को नया बाजार स्थित वाराणसी अस्पताल में भर्ती कराया गया.
यहां इलाज शुरू करने से पहले 30 हजार रुपये जमा कराए गए. कागजी प्रक्रिया पूरी कराई गई. इसके बाद ऑपरेशन किया गया.जिसके कुछ ही देर बाद महिला की मौत हो गयी. इस बात की खबर आग की तरह फैलते ही अस्पताल पर परिजन एवं स्थानीय लोगों का जमावड़ा हो गया. लोग हंगामा करने लगे. इससे पहले ही चिकित्सक़ एवं अन्य स्टाफ अस्पताल छोड़कर फरार हो गए.
मां ने लापरवाही का लगाया आरोप
मृतक महिला की माँ ने चिकित्सकों पर घोर लापरवाही का आरोप लगाया है.इसने कहा कि ऑपरेशन के बाद बच्चा सुरक्षित पैदा हुआ था. महिला की हालत गंभीर बताकर उसे रेफर करने की बात कही गई.लेकिन रेफर से संबंधित कोई लिखित कागजात नहीं दिया गया. जबकि इस समय महिला की मौत हो चुकी थी. इसी दौरान सभी डॉक्टर यहां से गायब हो गए.
वार्ड पार्षद ने जांच की उठाई मांग
वार्ड पार्षद राजकुमार राय उर्फ झब्बू राय ने कहा कि उनके वार्ड की महिला की मौत हुई है जो काफी दुखद है. उन्होंने इस तरह के अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई की मांग की और कहा कि दोषियों को किसी भी हालत में नहीं बक्शा जाना चाहिए. घटना के बाद देर रात तक मोहल्ले के सैकड़ो लोग अस्पताल को घेरकर कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे. घटनास्थल पर पहुंचे नगर थाना अध्यक्ष मनोज कुमार ने पहुंचकर लोगों को शांत कराकर निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया.
अस्पताल प्रबंधन पर उठ रहे सवाल
अस्पताल में मौजूद गया जिले के एक स्टाफ, जो अस्पताल में पैथोलैब का कार्य करता है.इसने बताया कि ऑपरेशन सदर अस्पताल से जुड़े डॉक्टर नमिता सिंह और डॉ. अभिषेक कुमार द्वारा किया गया. वहीं अस्पताल का संचालन गोविंद कुमार द्वारा किया जा रहा है.यह सदर अस्पताल के कर्मी बताए जा रहे हैं.
स्वास्थ्य विभाग पर उठ रहे सवाल
इस तरह की हुई घटना से स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का मामला उजागर हुआ है. जहां विभागीय अधिकारी लगातार यह कहते हैं कि सरकारी अस्पताल में रहने वाले डॉक्टर निजी अस्पताल नहीं चलाएंगे या फिर किसी प्रकार की कोई अन्य कार्य नहीं करेंगे. बावजूद निजी अस्पताल में जाकर ऑपरेशन करना एवं इस तरह की घटना होना स्वास्थ्य विभाग को कटघरे में खड़ा कर रहा है. समाज सेवी एवं बुद्धिजीवियों ने इस तरह के मामले को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है.







