मजदूरों को रोजगार देने में विफल हो रही केंद्र सरकार : कांग्रेस


नेशनल आवाज़ /बक्सर :- अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी एवं बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार शनिवार को केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलकर “जी श्री राम” जी किए जाने के प्रस्ताव के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया.जिसकी अध्यक्षता जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडेय ने की.डॉ. मनोज पांडेय ने कहा कि मनरेगा किसी सरकार की दया नहीं, बल्कि देश के ग्रामीण गरीबों का संवैधानिक और कानूनी अधिकार है.मनरेगा की शुरुआत वर्ष 2005 में कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार द्वारा की गई थी.
जिसका उद्देश्य ग्रामीण गरीबों को रोजगार की गारंटी देना, भुखमरी और बेरोजगारी से सुरक्षा प्रदान करना तथा मजबूरी में होने वाले पलायन को रोकना था. इस योजना ने करोड़ों ग्रामीण परिवारों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर दिया है.डॉ. पांडेय ने केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा का नाम बदलने के प्रयास को संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के विरुद्ध,एक सार्वजनिक रोजगार कानून का सांप्रदायिकीकरण, गरीब मजदूरों के अधिकारों के साथ सीधा खिलवाड़ बताया.
उन्होंने कहा कि रोजगार जैसे गंभीर विषय को धार्मिक और राजनीतिक एजेंडे में बदलना पूरी तरह अस्वीकार्य है.उन्होंने सवाल उठाया कि आज मजदूर सरकार से पूछ रहा है—मजदूरी समय पर क्यों नहीं मिल रही?मनरेगा में काम के अवसर क्यों घटाए जा रहे हैं?हर साल इसके बजट में कटौती क्यों हो रही है?नाम बदलने से न रोजगार बढ़ेगा, न मजदूरी और न ही गरीबों की जिंदगी सुधरेगी. यह केवल जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने की साजिश है.डॉ. पांडेय ने कहा कि मनरेगा हर धर्म, हर जाति और हर वर्ग के लिए समान कानून है. धार्मिक नाम जोड़ने से सामाजिक सौहार्द को खतरा है और गरीब मजदूरों के बीच भ्रम व असुरक्षा पैदा होगी. कांग्रेस पार्टी का स्पष्ट मत है कि धर्म आस्था का विषय है और रोजगार अधिकार का.उन्होंने केंद्र सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब सरकार रोजगार देने में विफल होती है, तब वह भावनात्मक और धार्मिक राजनीति का सहारा लेती है.
कांग्रेस पार्टी ने मांगो को रखते हुए कहा की मनरेगा का नाम एवं मूल स्वरूप यथावत रखा जाए,मनरेगा को कमजोर करने के सभी प्रयास तत्काल बंद किए जाएँ,मजदूरों को समय पर पूरी मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित किया जाए,काम मांगने पर काम देने की कानूनी व्यवस्था सख्ती से लागू हो,मनरेगा के बजट में पर्याप्त वृद्धि की जाए.साथ ही आंदोलन की रूपरेखा भी जारी किया. जिसमें 11 जनवरी 2026 को शांतिपूर्ण उपवास कार्यक्रम12 जनवरी से 29 जनवरी तक प्रत्येक ग्राम पंचायत में चौपाल कार्यक्रम होगा.इस दौरान मनरेगा मजदूरों एवं कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा भारत के राष्ट्रपति के नाम पोस्टकार्ड भेजे जाएंगे, जिसमें मनरेगा को बचाने एवं सशक्त रूप में बहाल करने की मांग की जाएगी.डॉ. पांडेय ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि मनरेगा के साथ छेड़छाड़ जारी रही तो कांग्रेस पार्टी सड़क से संसद तक संघर्ष करेगी.
बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नियुक्त जिला प्रभारी मृणाल अनामय ने कहा,“मनरेगा गरीब का अधिकार है.इसे कमजोर करने की हर साज़िश के खिलाफ कांग्रेस पार्टी पूरी ताकत से खड़ी है.”पूर्व विधायक संजय कुमार तिवारी उर्फ मुन्ना तिवारी एवं पूर्व विधायक विश्वनाथ राम ने कहा कि महात्मा गांधी के नाम से इस प्रकार का खिलवाड़ लोकतंत्र के लिए अत्यंत घातक है और देश का लोकतंत्र खतरे में है. मोदी सरकार गरीबों के अधिकार छीनकर पूंजीपतियों को सौंपना चाहती है, जिसे कांग्रेस कभी बर्दाश्त नहीं करेगी.
बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य डॉ. प्रमोद ओझा ने कहा कि मनरेगा पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की दूरदर्शिता का परिणाम है, जिसने गरीबों को अधिकार दिया, और इसके साथ हो रहा खिलवाड़ कांग्रेस स्वीकार नहीं करेगी.प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से किसान प्रकोष्ठ अध्यक्ष संजय कुमार पांडेय, युवा कांग्रेस के पंकज उपाध्याय, वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रो. पी.के. मिश्रा, ब्लॉक अध्यक्ष कमल पाठक, नीलू मिश्रा, त्रिजोगी नारायण मिश्रा, अभय मिश्रा, जिला सोशल मीडिया अध्यक्ष महेंद्र चौबे सहित अनेक कांग्रेसजन उपस्थित थे.






