गोकुल जलाशय-पक्षी विशेषज्ञों बर्डवॉचर्स के लिए अनूठा प्राकृतिक धरोहर : डीएम


नेशनल आवाज़ /बक्सर :- जिले के ब्रह्मपुर चक्की क्षेत्र के अंतर्गत स्थित गोकुल जलाशय के विकास कार्यों को लेकर डीएम साहिला ने निरीक्षण किया.इस क्षेत्र के अधिकारियो ने बताया की अंचल चक्की में पड़ने वाले सभी मौजा का सीमांकन किया जा चुका है.अंचल ब्रह्मपुर में शेष सीमांकन का कार्य कराया जा रहा है. जिलाधिकारी द्वारा भूमि सुधार उप समाहर्ता डुमरांव को निदेशित किया गया कि अपने अनुश्रवण में सीमांकन का कार्य शीघ्र करना सुनिश्चित करेंगे.
कार्यपालक अभियंता ग्रामीण कार्य प्रमंडल को निदेशित किया गया कि जलाशय के समीप पथ की मरम्मति कराना सुनिश्चित करेंगे.वन प्रमंडल पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि गोकुल जलाशय के समीप रेस्क्यू सेंटर,इंटरप्रिटेशन सेंटर, टूरिस्ट हब, वॉच टावर, गेस्ट हाउस आदि का निर्माण कार्य हेतु कार्य योजना बनाई जा रही है.जिलाधिकारी साहिला ने बताया कि प्रति वर्ष गोकुल जलाशय में प्रवासी पक्षियों का महाकुम्भ लगता है.
65 प्रजातियों के लगभग 3500 पंक्षी यहां आते है. जिसमें नॉर्दर्न शोवलर, गार्गेनी, रूडी शेलडक, ऑस्प्रे, केस्ट्रेल, सैंडपाइपर, येलो वैगटेल के साथ-साथ प्रवासी और दुर्लभ प्रजातियों की पक्षी जैसे इजिप्शियन वल्चर (सफेद गिद्ध) भी सम्मिलित हैं.गोकुल जलाशय के पास आधारभूत संरचना निर्माण के लिए कई रैयतों का जमाबंदी अंचल कार्यालय चक्की में चल रहा है जिसका यथाशीघ्र विधिसम्मत कार्रवाई करते हुए जमाबंदी रद्द करने हेतु भूमि सुधार उप समाहर्ता डुमरांव को निर्देश दिया गया.ताकि ससमय निर्माण कार्य प्रारंभ कराया जा सके.
निरीक्षण के क्रम में पाया गया कि स्थानीय ग्रामीणों द्वारा नदी में अपशिष्ट पदार्थ/मूर्ति विसर्जन का कार्य किया जा रहा है.जिसके कारण पर्यावरण की दृष्टिकोण से नदियों में प्रवास करने वाले जीव जंतुओं के अस्तित्व पर भी संकट मंडराने का खतरा उत्पन्न होने की संभावना बनी रहती है. इस संबंध में अंचलाधिकारी चक्की एवं भूमि सुधार उप समाहर्ता डुमरांव को अपशिष्ट पदार्थ के प्रवाह हेतु आस पास के क्षेत्र में कृत्रिम तालाब का निर्माण कराने का निर्देश दिया गया.
बिहार में वर्ष 2022 से लगातार सबसे अधिक प्रवासी पक्षियों की प्रजातियां यहां देखने को मिली है.इन्होंने बताया कि आर्द्रभूमि पृथ्वी के जलवायु को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है आर्द्रभूमि विभिन्न प्रकार की प्रजातियों का घर है जो जल शुद्धिकरण और बाढ़ नियंत्रण जैसी परिस्थितियों से निपटने में सहयोगी होता हैं.
रामसर स्थल घोषित हुआ गोकुल जलाशय
गोकुल जलाशय को रामसर स्थल के रूप में घोषित किया गया है.इस दौरान विभिन्न प्रजातियों के कई प्रवासी पक्षी भी देखे गये, जिनमें नॉर्दर्न शोवलर, गार्गेनी, रूडी शेलडक, ऑस्प्रे, केस्ट्रेल, सैंडपाइपर, येलो वैगटेल आदि प्रमुख रहीं.गोकुल जलाशय में जलकुम्भी की सफाई और खुला जल क्षेत्र होने के कारण पक्षियों के लिए एक आदर्श आश्रय स्थल बन गया है.
वेटलैंड के महत्व से छात्र-छात्राओं, आम जनों को अवगत कराने हेतु जिला प्रशासन एवं वन प्रमंडल बक्सर के द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं. विश्व आद्रभूमि दिवस के अवसर पर दिनांक 02 फरवरी 2026 को विद्यालय के छात्र-छात्राओं को गोकुल जलाशय वेटलैंड भ्रमण कराया जाना है एवं उन्हें वेटलैंड के बारे में प्रमुख जानकारी से अवगत कराया जाएगा.
नोडल पदाधिकारी नमामि गंगे को निर्देश दिया गया कि वन प्रमंडल पदाधिकारी से समन्वय स्थापित कर आयोजित होने वाले कार्यक्रम हेतु सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण कराना सुनिश्चित करेंगे.निरीक्षण के क्रम में अनुमंडल पदाधिकारी डुमरांव, अंचलाधिकारी ब्रह्मपुर, अंचलाधिकारी चक्की एवं अन्य लोग उपस्थित थे.






