Slide
जीवन में हजारों लड़ाइयां जीतने से अच्छा है कि तुम स्वयं पर विजय प्राप्त कर लो : गौतम बुद्ध
previous arrow
next arrow
Government

वसंत पंचमी महोत्सव में ज्ञान, कला एवं संस्कृति की दिखी झलक

युवाओं ने प्रस्तुत किया रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम

नेशनल आवाज़ /बक्सर :- वसंत पंचमी के शुभ अवसर पर नगर भवन में कला संस्कृति एवं युवा विभाग बिहार एवं जिला प्रशासन के सयुंक्त तत्वावधान में शुक्रवार को जिला पदाधिकारी साहिला के द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर एक दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया.जिला पदाधिकारी ने अपने संबोधन में कहा कि “वसंत पंचमी न केवल ज्ञान और बुद्धि का पर्व है, बल्कि यह हमारे समाज में कला, साहित्य और संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी माध्यम है.यह पर्व माँ सरस्वती के पूजन, ज्ञान, कला और संस्कृति के उत्सव के रूप में मनाया गया. प्राचीनकाल से इसे ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती के जन्मदिवस के रूप में माना जाता है.

इस दिन मां शारदे की पूजा कर उनसे और अधिक ज्ञानवान होने की प्रार्थना की जाती है.विद्यार्थियों द्वारा विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा कर अपने सफल भविष्य के लिए कामना की जाती है.कार्यक्रम का शुभारंभ कलाकारों द्वारा माँ सरस्वती वंदना से की हुई.महोत्सव में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगीत, नृत्य और काव्य पाठ का आयोजन किया गया. जिसमें स्थानीय कलाकारों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया.

 स्थानीय कलाकारों का रहा जलवा 

इस कार्यक्रम में स्थानीय स्कूल के छात्र -छात्राओं का जलवा रहा. इन कलाकारों ने भक्ति गीतों पर खूब झूमाया.अतिथियों ने कहा की वसन्त ऋतु वर्ष की एक ऋतु है जिसमें वातावरण का तापमान प्रायः सुखद रहता है. भारत में यह फरवरी से मार्च तक होती है. इस ऋतु की विशेषता है मौसम का गरम होना, फूलो का खिलना, पौधो का हरा भरा होना और बर्फ का पिघलना.इस मौसम में चारों ओर हरियाली होती है. पेड़ों पर नये पत्ते उगते है.वसंत ऋतु आते ही प्रकृति का कण-कण खिल उठता है. मानव तो क्या पशु-पक्षी तक उल्लास से भर जाते हैं. हर दिन नयी उमंग से सूर्योदय होता है और नयी चेतना प्रदान कर अगले दिन फिर आने का आश्वासन देकर चला जाता है.

पौराणिक कथाओं के अनुसार वसंत को कामदेव का पुत्र कहा गया है. कवि देव ने वसंत ऋतु का वर्णन करते हुए कहा है कि रूप व सौंदर्य के देवता कामदेव के घर पुत्रोत्पत्ति का समाचार पाते ही प्रकृति झूम उठती है, पेड़ उसके लिए नव पल्लव का पालना डालते है, फूल वस्त्र पहनाते हैं पवन झुलाती है और कोयल उसे गीत सुनाकर बहलाती है. भगवान कृष्ण ने गीता में कहा है ऋतुओं में मैं वसंत हूँ.कार्यक्रम में प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button