यूपीआई से 2000 से अधिक भुगतान पर 0.4 फीसदी तक शुल्क, 15 अक्टूबर से नियम होगा लागू

नेशनल आवाज़ :- सरकार ने मंगलवार को बड़े डिजिटल भुगतान के लिए जारी नयी व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पाने पर व्यापारियों से 0.4% एमडीआर शुल्क लेना तय कर दिया. इसमें 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर अधिकतम शुल्क 300 रुपये होगा.इसके साथ जनवरी, 2020 से लागू शून्य-एमडीआर व्यवस्था समाप्त हो गयी है. इस व्यवस्था को डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए लागू किया गया था, लेकिन बैंक और वित्तीय प्रौद्योगिकी (फिनटेक) कंपनियां लंबे समय से इस पर सवाल उठा रही थी.यह व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होगी. हालांकि बैंकों और भुगतान प्रणाली प्रदाताओं को 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन या रुपे डेबिट कार्ड के जरिये किये गये भुगतान पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई शुल्क न लगाने का निर्देश दिया है.
क्या है एमडीआर
‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर व्यापारी से लिया जाता है.
कहां लगेगा कितना शुल्क
रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि कच्चा माल क्षेत्र: प्रति लेनदेन पांच रुपये का एकसमान शुल्क.पूंजी बाजार (म्यूचुअल फंड, प्रतिभूति, शेयर ब्रोकर): भुगतान पर 0.02%, अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी.व्यक्तिगत लेन-देन (P2P): व्यक्तियों के बीच लेन-देन की राशि चाहे जितनी हो, भुगतान पर कोई शुल्क नहीं.बड़े लेनदेन: व्यापारियों से लिये जाने वाले शुल्क ₹75,000 और अधिक के लेनदेन पर ₹300.सामान्य व्यापारी लेनदेन: ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट.
इन्हें मिलेगी राहत
यूपीआई क्यूआर कोड से हर माह एक लाख रुपये तक की आय वाले छोटे व्यापारी नयी व्यवस्था के तहत पूरी तरह शुल्क मुक्त रहेंगे.दो व्यक्तियों के बीच होने वाले पी2पी यूपीआई लेनदेन पर असर नहीं. ऐसे हस्तांतरण यूपीआई लेनदेन की कुल मात्रा का 80% और मूल्य का 70 प्रतिशत हैं.






