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दधीचि देह दान समिति का क्षेत्रीय सम्मेलन संपन्न, सिक्किम के पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद ने कहा- “देहदान कर मृत्यु के बाद भी लोगों के दिलों में रहें जिंदा”

नेशनल आवाज़ / ​बक्सर  :- शहर के निजी होटल के सभागार में दधीचि देह दान समिति के तत्वावधान में भव्य क्षेत्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति की प्रदेश उपाध्यक्ष सह जिला अध्यक्ष मीना सिंह ने की, जबकि मंच संचालन आशा पर्यावरण सुरक्षा के राज्य संयोजक सह शिक्षक विपिन कुमार द्वारा किया गया.​कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ पूर्व उप मुख्यमंत्री सह समिति के दिवंगत अध्यक्ष सुशील कुमार मोदी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर और राष्ट्रगान के साथ किया गया.

मरने के बाद शरीर का कोई महत्व नहीं, अंगदान कर महादान करें:  गंगा प्रसाद

सम्मानित होते विपिन कुमार एवं इनकी पत्नी

​सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद सिक्किम के पूर्व राज्यपाल सह समिति के प्रदेश अध्यक्ष गंगा प्रसाद ने लोगों को प्रेरित करते हुए कहा कि मानवता को कायम रखने के लिए अंगदान और देहदान ही सबसे बड़ा महादान है.उन्होंने कहा,जीवात्मा के निकलने के बाद इस नश्वर शरीर का कोई महत्व नहीं रह जाता है. इसलिए परिवारों को जागरूक कर अपने अंगों का सदुपयोग सुनिश्चित करें ताकि मृत्यु के बाद भी आप लोगों के दिलों में जिंदा रह सकें.” उन्होंने लोगों से मरणोपरांत नेत्रदान करने की भी भावुक अपील की.

हम नहीं जगे तो डॉक्टर कैसे बनेंगे: पद्मश्री विमल कुमार जैन

कार्यक्रम में भाग लेते लोग

विशिष्ट अतिथि पद्मश्री विमल कुमार जैन ने बिहार में देहदान की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अब तक रिसर्च के लिए आईजीआईएमएस को 21, दरभंगा मेडिकल कॉलेज को दो और पीएमसीएच को केवल एक बॉडी ही मिल सकी है. उन्होंने कहा कि अगर हम आज नहीं जागे तो हमारे भविष्य के डॉक्टर कैसे सीखेंगे? देहदान करने वाला व्यक्ति सबसे महान होता है, जिसके एक शरीर से कई छात्र डॉक्टर बनते हैं और आगे चलकर हजारों लोगों को जीवनदान देते हैं.इसके लिए दानदाता के साथ-साथ उनके परिवार के सदस्यों का जागरूक होना भी बेहद जरूरी है.

​बक्सर में 200 लोगों ने लिया संकल्प, दो का हुआ देहदान

समिति की जिला अध्यक्ष मीना सिंह ने बक्सर जिला इकाई की उपलब्धियां साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2019 में जिला स्तरीय समिति के गठन के बाद से यह टीम लगातार धरातल पर काम कर रही है. अब तक जिले में दो सफल देहदान हो चुके हैं और मानवता की मिसाल पेश करते हुए लगभग 200 लोगों ने अंगदान एवं देहदान का संकल्प पत्र भरा है. सम्मेलन के दौरान इन सभी संकल्प पत्रों को सामूहिक रूप से राज्य अध्यक्ष को सौंपा गया.

नेत्रदान का कोई कृत्रिम विकल्प नहीं: डॉ. सुभाष कुमार

​मौके पर मौजूद डॉ. सुभाष कुमार ने नेत्रदान के तकनीकी और मानवीय पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश में कॉर्निया और नेत्रपटल की भारी कमी है. चिकित्सा विज्ञान में अभी तक आंख का कोई आर्टिफिशियल (कृत्रिम) उपाय नहीं है, इसलिए नेत्रहीन लोगों के जीवन में रोशनी लाने का एकमात्र जरिया नेत्रदान ही है.

मरणोपरांत देहदाता के परिजन हुए सम्मानित

​समारोह के दौरान मानवता की अनूठी मिसाल पेश करने वाले मरणोपरांत देहदाता रामछबीला सिंह के भतीजे सुजीत सिंह को समिति द्वारा अंगवस्त्र और सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया.​इस वैचारिक और प्रेरणादायी सम्मेलन में मुख्य रूप से राजकुमार सिंह, नीलम श्रीवास्तव, अनु कुशवाहा, बबन सिंह, नागेंद्र प्रसाद, अनीता यादव सहित जिले के कई गणमान्य लोग, सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी मौजूद रहे.

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