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बक्सर शिक्षा विभाग की शर्मनाक तस्वीर, पानी में डूबी परीक्षा की तैयारियां, भीगते प्रश्न पत्र ले गए शिक्षक

नेशनल आवाज़ /​बक्सर :- सरकार के तमाम दावों और शिक्षा विभाग के कड़े निर्देशों की पोल मानसून की पहली बारिश ने ही खोल कर रख दी है. जिला मुख्यालय स्थित जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय परिसर में हुए जलजमाव ने न सिर्फ प्रशासनिक तैयारियों को बेनकाब किया है, बल्कि जिले के लाखों छात्रों के भविष्य को भी पानी में तैरने के लिए छोड़ दिया है.

पहली ही बारिश में लगा पानी, तैरने लगे प्रश्न पत्र

​बुधवार 1 जुलाई से शुरू होने वाली कक्षा 9वीं से 12वीं तक की त्रिमासिक परीक्षा से जुड़ा है.सरकार और विभाग के निर्देशानुसार इस परीक्षा के प्रश्न पत्र शिक्षा विभाग के कार्यालय बुनियादी स्कूल परिसर में रखे गए थे. लेकिन विभाग की घोर लापरवाही का खुलासा तब हुआ, जब जोरदार बारिश के बाद पूरे परिसर में पानी भर गया.पानी का बहाव इतना तेज था और इंतजाम इतने लचर थे कि विभिन्न विद्यालयों के लिए रखे गए प्रश्न पत्रों के बंडल पानी में तैरने लगे.

विद्यालयवार तैयार बंडल हुए खराब, शिक्षक भी हैरान

​सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ये प्रश्न पत्र छात्रों के अनुपात के अनुसार विद्यालयवार अलग-अलग बंडलों में तैयार कर रखे गए थे.सुबह जब विभिन्न स्कूलों के प्रधानाध्यापक और शिक्षक प्रश्न पत्र लेने कार्यालय पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर दंग रह गए. पानी में भीगते और तैरते प्रश्न पत्रों को देखकर शिक्षकों में भारी आक्रोश और आश्चर्य देखा गया.जिसके हाथ जो लगा, लेकर चलता बना.

परिसर में अफरा-तफरी का माहौल ऐसा था कि अव्यवस्था के बीच शिक्षकों को जो भी प्रश्न पत्र (चाहे वह भीगा हो या सूखा) हाथ लगा, उसे लेकर वे अपने-अपने विद्यालयों की ओर चलते बने.कई प्रधानाध्यापकों ने शिक्षा विभाग की इस लचर व्यवस्था पर कड़ी नाराजगी जाहिर की और कहा कि इस हालत में निष्पक्ष और सुचारू परीक्षा कराना भगवान भरोसे है.

तमाशा देखते रहे वरीय अधिकारी, सुधि लेने वाला कोई नहीं

​इस पूरी घटना का सबसे शर्मनाक पहलू यह रहा कि जब लाखों छात्रों के भविष्य का आधार ये प्रश्न पत्र पानी में बर्बाद हो रहे थे, तब विभाग के तमाम वरीय पदाधिकारी मूकदर्शक बने तमाशा देख रहे थे. किसी भी अधिकारी ने समय रहते प्रश्न पत्रों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने या जलजमाव को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया.अधिकारियों की इस संवेदनहीनता ने शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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