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जीवन में हजारों लड़ाइयां जीतने से अच्छा है कि तुम स्वयं पर विजय प्राप्त कर लो : गौतम बुद्ध
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तियरा की बेटी पंचरत्ना ने देश में गाड़ा झंडा, 18 राज्यों के पहलवानों को पस्त कर तीसरी बार जीता गोल्ड

नेशनल आवाज़ /बक्सर :-  ​सपनों को पंख देने के लिए किसी आलीशान महल की नहीं, बल्कि फौलादी हौसलों और पसीने की बूंदों की जरूरत होती है.इसे सच कर दिखाया है बिहार पुलिस की जांबाज महिला कांस्टेबल और बक्सर जिले के राजपुर प्रखंड अंतर्गत तियरा गांव की बेटी पंचरत्ना कुमारी ने.​मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित ‘चमेली देवी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट’ में 21 से 23 अगस्त तक आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय कॉम्बैट कुश्ती प्रतियोगिता में पंचरत्ना ने अपनी ताकत और दांव-पेंच का लोहा मनवाया.

18 राज्यों बंगाल, हरियाणा, छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र आदि से आए दिग्गज पहलवानों को धूल चटाते हुए उन्होंने 72 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक अपने नाम किया और बिहार का मस्तक गर्व से ऊंचा कर दिया.​एक साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर खाकी वर्दी पहनने और फिर अखाड़े में देश-प्रदेश का नाम रोशन करने का पंचरत्ना का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है.

​इससे पहले नेपाल में आयोजित साउथ एशिया कॉम्बैट कुश्ती में 8 देशों की सहभागिता के 75 किलो भार वर्ग में भी उन्होंने देश के लिए स्वर्ण पदक जीता था.राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह उनका तीसरा गोल्ड मेडल है. वह साबित कर चुकी हैं कि अगर इरादे बुलंद हों, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती.पंचरत्ना की यह जीत केवल एक पदक नहीं, बल्कि गांव की उन तमाम बेटियों की उम्मीदों की जीत है जो सीमित साधनों में भी बड़े सपने देखने की हिम्मत रखती हैं.

इस स्वर्णिम सफलता पर उनकी मां सरस्वती बौद्ध, समाज सेवी सरोज साधु, भीमराम समेत पूरे गांव और पुलिस महकमे में जश्न का माहौल है.गांव की गलियों से शुरू हुआ यह सफर आज पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है.

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