बक्सर में सीएम ने 592 करोड़ कि योजनाओं का दिया सौगात


नेशनल आवाज़ /बक्सर :- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ के तहत राज्य के विकास का नया अध्याय लिख रहे हैं. पांचवें चरण में बक्सर पहुंचे सीएम ने 592 करोड़ रुपये की योजनाओं की सौगात दी.यहां 106 करोड़ रुपये की लागत से 41 योजनाओं का उद्घाटन किया गया, जबकि 486 करोड़ रुपये की 23 नई योजनाओं का शिलान्यास हुआ.
जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2005 से पहले के बिहार की याद दिलाई. उन्होंने कहा कि जब उन्होंने सत्ता संभाली थी, तब राज्य में डर का माहौल था और लोग शाम के बाद बाहर निकलने से डरते थे.सीएम ने गर्व से कहा कि आज बिहार में कानून का राज है और लोग बिना किसी डर के दिन हो या रात, कहीं भी आ-जा सकते हैं. उन्होंने सांप्रदायिक सौहार्द पर जोर देते हुए कहा कि उनकी सरकार ने हिंदू-मुस्लिम विवादों को खत्म कर समाज में शांति स्थापित की है. जगह-जगह मुस्लिम कब्रिस्तानों की घेराबंदी की गई है.
हर गांव में होगा उद्योग
समृद्धि यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने केवल सड़कों और पुलों की बात की, बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण का बड़ा रोडमैप भी पेश किया. उन्होंने गरीब परिवारों को सहायता राशि देने और राज्य में नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने की प्रतिबद्धता दोहराई.सीएम ने कहा कि बिहार अब निवेश के लिए तैयार है और औद्योगिक विकास से युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार मिलेगा.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंच पर डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और बीजेपी नेता और पूर्व आईपीएस अधिकारी आनंद मिश्रा के कंधे पर हाथ रखे हुए दिखाई दिए. दोनों नेताओं के कंधे पर हाथ रखने के बाद जनता से सीएम नीतीश ने हाथ उठाकर समर्थन करने की अपील की. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार का पूरा सहयोग मिल रहा है. सब लोग काम करते हैं. सब कुछ बढ़िया हो जाएगा.
हर घर में पहुंच गयी बिजली
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले बिहार में बिजली की स्थिति बेहद खराब थी, लेकिन अब गांव-गांव तक बिजली पहुंच चुकी है. उन्होंने बताया कि सरकार अब लोगों की छतों पर सोलर पैनल लगवा रही है, जिसका खर्च भी सरकार ही उठा रही है. सीएम ने इस दौरान दावा किया कि अब तक 50 लाख युवाओं को नौकरी और रोजगार दिया जा चुका है. आने वाले पांच सालों में 1 करोड़ रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया है, जिसे और बढ़ाने की भी योजना है.मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘समृद्धि यात्रा’ का उद्देश्य केवल घोषणाएं करना नहीं, बल्कि यह देखना भी है कि धरातल पर काम कितना हुआ है. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शिलान्यास की गई योजनाओं को निर्धारित समय सीमा के अंदर गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए.






