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वर्तमान पाटलिपुत्र के कहानीकार नीतीश कुमार, बिहार सीएम के दौड़ में सम्राट आगे

नेशनल आवाज़ :- ​नीतीश कुमार केवल एक राजनेता नहीं बल्कि एक गहरे अध्येता भी हैं.​राज्य सभा में जाने के बाद बिहार के नये मुख्‍य मंत्री की चर्चा चल रही है. फैसला भाजपा को करना है. सबसे आगे सम्राट चौधरी हैं. कोई सवर्ण की चर्चा नहीं है . जब तक नाम का एलान नही होता तब तक कई कयास लगाए जा रहे है.बिहार में लव-कुश की राजनीति के जनक नीतीश कुमार है. लव मतलब कुर्मी, कुश मतलब कुशवाहा लव ने राज कर लिया.

कुश इंतजार में है.नीतीश कुमार ने जाते-जाते पूरे बिहार को संदेश दे दिया कि वे कुश के पक्ष में हैं. सम्राट चौधरी की पीठ खुले में थपथपा रहे है. उन्होंने लंबे समय तक भारतीय संसद और बिहार विधानसभा में अपनी बात रखी है. उनके वक्तव्यों का संकलन एक ऐसी कहानी कहता है जो समाजवादी विचारधारा, जेपी आंदोलन और लोहिया के सिद्धांतों पर आधारित है.वे अक्सर अपनी बातों में बिहार के इतिहास और चाणक्य की नीतियों का उल्लेख करते हैं, जो उनके ‘पाटलिपुत्र’ के प्रति लगाव को दर्शाता है.

सामाजिक सुधारों की पटकथा

​एक कहानीकार की तरह उन्होंने बिहार के सामाजिक ढांचे में बदलाव की नई पटकथाएँ लिखी हैं.जैसे:

महिला सशक्तिकरण: साइकिल योजना और पंचायती राज में आरक्षण.

​मद्यनिषेध: समाज को कुरीतियों से मुक्त करने की एक साहसी कहानी.

​न्याय के साथ विकास: समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को मुख्यधारा में लाना.

नीतीश कुमार को “पाटलिपुत्र का कहानीकार” कहना उनके उस विजन को दर्शाता है, जिसमें वे आधुनिक बिहार को उसके प्राचीन गौरव (मगध और पाटलिपुत्र) के साथ जोड़कर देखना चाहते हैं. 

राष्ट्रीय फलक पर बनाई पहचान 

सीएम नीतीश कुमार पिछले कई दशक से राष्ट्रीय फलक पर अपनी पहचान बना चुके हैं.इन्होंने वर्ष 2015 में बिहार की धरती पर पहली बार सशक्त सामाजिक संगठन सम्राट अशोक क्लब के तत्कालीन बिहार प्रभारी डी. एन मौर्य एवं उनके सहयोगी प्रोफेसर मनोज कुमार के कुशल नेतृत्व में इनके साथ समर्पित रहे.जिनके बल पर माननीय नीतीश कुमार भी मजबूती के साथ विश्व धरा पर अपनी एक अलग पहचान बनाने वाले महान सम्राट अशोक की जयंती को लेकर छुट्टी की घोषणा की थी.तभी से इनकी बनी हुई पहचान आज देश के अलावा दुनिया के अन्य देशों में भी है.

अगर इस बार सम्राट चौधरी को सीएम नहीं बनाया गया तो सबसे अधिक नुकसान माननीय सीएम नीतीश कुमार को हो सकता है.इसी विश्वास  के बल पर माननीय नीतीश कुमार विगत इतने वर्षों से बिहार में कुर्सी के साथ एक नई ऊंचाइयों को आयाम दे रहे हैं.

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