बड़ी खबर: सांसद सुधाकर सिंह का राज्य सरकार पर हमला, टेंडर प्रक्रिया में ‘बड़े खेल’ का लगाया आरोप


नेशनल आवाज़ /बक्सर :- लोकसभा सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार की निविदा (टेंडर) प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री को एक कड़ा पत्र लिखा है.सांसद ने आरोप लगाया है कि बिहार के स्थानीय ठेकेदारों को प्राथमिकता देने के कैबिनेट के फैसले को विभागीय अधिकारी ‘साजिश’ के तहत विफल कर रहे हैं ताकि बाहरी राज्यों मुंबई और गुजरात की कंपनियों को फायदा पहुँचाया जा सके.
छोटे टेंडरों को जोड़कर बनाया जा रहा बड़ा ‘पैकेज’
सांसद सुधाकर सिंह ने अपने पत्र में दो प्रमुख विभागों ग्रामीण कार्य विभाग और पथ निर्माण विभाग (RCD) की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं. कैबिनेट ने फैसला लिया था कि 50 करोड़ रुपये तक के टेंडर में बिहार के स्थानीय संवेदकों को प्राथमिकता दी जाएगी. सांसद का आरोप है कि अधिकारी इस नियम को दरकिनार कर रहे हैं. पत्र के अनुसार, पथ निर्माण विभाग में 30 से 40 करोड़ रुपये की लागत वाली 4-5 अलग-अलग सड़कों को एक साथ जोड़कर 150 करोड़ रुपये से अधिक का एक बड़ा टेंडर निकाला जा रहा है.”ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि स्थानीय ठेकेदार रेस से बाहर हो जाएं और मुंबई या गुजरात की बड़ी कंपनियों को काम सौंप दिया जाए.
अपरिहार्य कारणों से टेंडर रद्द करने पर सवाल
सांसद ने ग्रामीण कार्य विभाग का जिक्र करते हुए कहा कि कैमूर सहित बिहार के अन्य जिलों में 20 से 30 करोड़ की जिन परियोजनाओं का Financial एवं Technical Bid हो चुका था, उन्हें 30 अप्रैल को अचानक “अपरिहार्य कारणों” का हवाला देकर रद्द कर दिया गया.उन्होंने मांग की है कि इन कारणों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए.सुधाकर सिंह ने पत्र के अंत में मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है.
सांसद की प्रमुख मांगें
रद्द की गई निविदाओं और क्लब किए गए बड़े टेंडरों की जांच हो.50 करोड़ तक के टेंडर में स्थानीय ठेकेदारों को प्राथमिकता देने के फैसले को सख्ती से लागू किया जाए.दोषी अधिकारियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए.
घोषणाएं केवल चुनावी भाषण न बनें
सांसद ने सरकार को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि इस पर कार्रवाई नहीं होती है, तो यह माना जाएगा कि सरकार की घोषणाएं केवल “राजनीतिक भाषण” तक सीमित हैं और सरकार बिहार के बजाय बाहरी राज्यों के हितों के लिए काम कर रही है.






