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बनारपुर गांव के बेटे ने रचा इतिहास: NEET में लगाई 1793वीं रैंक की छलांग

नेशनल आवाज़ /बक्सर :- पहली कोशिश में मनचाही सफलता न मिलने पर अक्सर छात्र टूट जाते हैं, लेकिन बक्सर के बनारपुर गांव के एक छोटे से किसान के बेटे ने साबित कर दिया कि अगर हौसला बुलंद हो, तो असफलता भी सफलता की सीढ़ी बन जाती है. बनारपुर निवासी अभिनव मौर्य ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और एक साल की कड़ी तपस्या के बाद NEET-2026 में शानदार बाजी मारी है.उन्होंने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 1793 और कैटेगरी रैंक 598 हासिल कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया है.

​पिछली बार मिली थी 8,000 रैंक, पर समझौते से किया इनकार

​अभिनव के पिता रमाकांत सिंह एक साधारण किसान हैं. पिछले साल नीट परीक्षा में अभिनव को करीब 8,000 रैंक मिली थी.इस रैंक पर भी उन्हें कोई न कोई मेडिकल कॉलेज मिल जाता, लेकिन अभिनव का लक्ष्य बड़ा था.उन्होंने किसी भी साधारण कॉलेज में दाखिला लेने के बजाय खुद को एक और मौका दिया. पूरे एक साल तक दुनिया से कटकर, रोजाना 12 से 14 घंटे की कड़ी पढ़ाई की और आज नतीजा सबके सामने है.

जिस परिवार में 5 साल से कोई 12वीं पास नहीं था, वहाँ अब गढ़े जा रहे कीर्तिमान

अभिनव की यह सफलता इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि उनका परिवार बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आता है.अभिनव बताते हैं पिछले पांच वर्षों से हमारे परिवार में किसी ने 12वीं की परीक्षा भी पास नहीं की थी. लेकिन अब, हम तीनों भाई मिलकर शिक्षा के दम पर अपने परिवार की एक नई पहचान बना रहे हैं.​वाराणसी के प्रतिष्ठित सीएचएस (BHU) से स्कूली शिक्षा और फिर कोटा से कोचिंग करने वाले अभिनव ने कहा कि तैयारी के दौरान कई बार मानसिक और आर्थिक रूप से कठिन परिस्थितियां आईं, लेकिन उन्होंने कभी अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया.

भविष्य का संकल्प: गरीबों की सेवा

​डॉक्टर बनने की राह पर कदम बढ़ा चुके अभिनव का सपना बेहद नेक है.वे एक डॉक्टर के रूप में गरीब और जरूरतमंद मरीजों की नि:शुल्क और बेहतर सेवा करना चाहते हैं.इन्होंने कहा असफलता से कभी घबराएं नहीं.यह आपकी हार नहीं, बल्कि आपकी कमजोरियों को जानने का एक मौका है. अपनी कमियों को पहचानें, उन पर दोगुनी मेहनत करें, सफलता निश्चित रूप से कदम चूमेगी.

गांव में जश्न का माहौल

​अभिनव की इस ऐतिहासिक कामयाबी से बनारपुर गांव सहित पूरे बक्सर जिले में जश्न का माहौल है.ग्रामीणों का कहना है कि अभिनव ने न सिर्फ अपने माता-पिता का सिर फख्र से ऊंचा किया है, बल्कि वह क्षेत्र के उन हजारों युवाओं के लिए एक रोल मॉडल बन गए हैं जो संसाधनों की कमी के आगे घुटने टेक देते हैं.

 

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