राजपुर का लाल बना BDO: पिता के साये के बिना, माँ और नाना-मामा के हौसले से अभिलाष ने रचा इतिहास


22 जून 2026
नेशनल आवाज़ /बक्सर :- ”करें कोशिश तो मुश्किल आसान होती है…”इस कहावत को सच कर दिखाया है राजपुर के रहने वाले अभिलाष कुमार सिंह ने. अभिलाष ने बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर बीडीओ का पद हासिल किया है. उनकी इस सफलता ने न सिर्फ उनके परिवार का मान बढ़ाया है, बल्कि पूरे इलाके को गौरवान्वित किया है. लेकिन इस बड़ी सफलता के पीछे संघर्ष, आंसुओं और कभी न हार मानने वाले जज्बे की एक बेहद मार्मिक दास्तां छुपी है.
टूटा दुखों का पहाड़: उठ गया पिता का साया
अभिलाष के लिए यह सफर कांटों भरा रहा है.बचपन में उनके पिता ब्रजेश सिंह इस दुनिया को अलविदा कह गए. उस वक्त अभिलाष बेहद छोटे थे और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था. पिता के जाने के बाद ऐसा लगा कि सारे सपने बिखर जाएंगे.लेकिन ऐसे कठिन समय में उनकी माँ सबिता सिंह, मामा धर्मेंद्र सिंह और नाना रमाशंकर सिंह ढाल बनकर खड़े हो गए. उन्होंने न सिर्फ अभिलाष को संभाला, बल्कि उनके सपनों को पंख देने के लिए अपना सब कुछ झोंक दिया. माँ के आँसू और परिवार के त्याग ने अभिलाष के भीतर एक ऐसी आग जला दी, जिसने उन्हें रुकने नहीं दिया.
बिना कोचिंग, सीमित संसाधनों में की ‘सेल्फ स्टडी‘
एक साधारण किसान परिवार से आने वाले अभिलाष के पास संसाधन बेहद सीमित थे. आर्थिक तंगहाली के कारण उन्हें बड़े शहरों में जाकर बड़ी कोचिंगों में पढ़ने का मौका नहीं मिला.लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी ताकत बनाया. उन्होंने घर पर रहकर ही दिन-रात एक कर खुद से पढ़ाई की. हर मुश्किल घड़ी में उनकी माँ सविता सिंह साये की तरह उनके साथ खड़ी रहीं और उनकी अच्छी परवरिश में कोई कमी नहीं छोड़ी.
असफलताओं से नहीं हारे हिम्मत, ‘जल पुरुष’ से ली प्रेरणा
वर्ष 2017 में स्नातक करने के बाद अभिलाष प्रशासनिक सेवा की तैयारी में जुट गए थे. यह उनका दूसरा प्रयास था. इससे पहले 66वीं BPSC में उन्होंने पीटी पास की थी, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका था. इसके अलावा यूपीपीसीएस (UPPCS) में भी वे इंटरव्यू तक पहुंचकर बाहर हो गए थे. लगातार मिल रही असफलताओं के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी.दो भाइयों में बड़े अभिलाष के छोटे भाई अनुभव सिंह होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई कर काम कर रहे हैं.पढ़ाई के साथ-साथ अभिलाष सामाजिक दायित्वों से भी जुड़े रहे.देश के मशहूर ‘जल पुरुष’ राजेंद्र सिंह के जल संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के आंदोलनों से प्रेरित होकर उन्होंने भूगोल जैसे विषय को न सिर्फ चुना, बल्कि उसे अपने जीवन में उतारा.
सफलता के बाद युवाओं के लिए संदेश
अपनी इस ऐतिहासिक सफलता पर अभिलाष ने परीक्षा की तैयारी कर रहे अन्य युवाओं को एक बेहद जरूरी और भावुक संदेश दिया है.अगर जीवन में असफलता मिले, तो भी हिम्मत मत हारिए. धैर्य बनाए रखिए और कड़ी मेहनत करते रहिए, सफलता एक न एक दिन आपके कदम जरूर चूमेगी. इस कामयाबी के बाद उनके मामा गांव राजपुर में जश्न का माहौल है. माँ सविता सिंह की आँखों में आज आंसू तो हैं, लेकिन वो आंसू गर्व और खुशी के हैं. अभिलाष की इस सफलता पर क्षेत्र के प्रबुद्ध समाजसेवियों, जिनमें विनय त्रिगुण,राजेश सिंह शामिल ने उनके घर पहुंचकर परिजनों को बधाई दी और अभिलाष के उज्जवल भविष्य की कामना की है. इस लाल ने साबित कर दिया कि अगर इरादे फौलादी हों, तो अभाव और गरीबी भी रास्ता नहीं रोक सकती.






