सफलता की मिसाल : संसाधनों की तंगी को मात दे बक्सर की सुंदरी बनीं स्टेट टैक्स असिस्टेंट कमिश्नर
बिना कोचिंग घर पर की शुरुआती तैयारी, दूसरे प्रयास में हासिल की 150वीं रैंक


नेशनल आवाज़ /बक्सर :- हौसलों से नापी आसमान की दूरी सीमित संसाधन, आर्थिक तंगी और अभावों की जिंदगी… सुनने में ये किसी सपने को तोड़ने के लिए काफी लगते हैं, लेकिन अगर हौसले बुलंद हों तो मुश्किलें खुद-ब-खुद रास्ता छोड़ देती हैं.इसे सच कर दिखाया है बक्सर जिले के चौसा प्रखंड स्थित बनारपुर गांव की बेटी सुंदरी कुमारी ने. सुंदरी ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा में 150वीं रैंक हासिल कर स्टेट टैक्स असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर अपना चयन पक्का किया है. उनकी इस ऐतिहासिक कामयाबी से न सिर्फ उनका परिवार, बल्कि पूरा जिला गौरवान्वित है.
मजदूर पिता का सिर गर्व से हुआ ऊंचा
सुंदरी कुमारी का बैकग्राउंड बेहद साधारण है. उनके पिता अनिल राम मजदूरी करके किसी तरह परिवार का भरण-पोषण करते हैं. घर की माली हालत ठीक न होने के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई में कभी रुकावट नहीं आने दी. सुंदरी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही सरकारी उच्च विद्यालय से पूरी की और महर्षि विश्वामित्र कॉलेज से स्नातक की डिग्री ली.सुंदरी कुमारी ने कहा की मेहनत और लगन कभी बेकार नहीं जाती.अगर आपके भीतर आत्मविश्वास और समर्पण है, तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको आपकी मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती.
असफलता से नहीं हारीं हिम्मत, सेल्फ स्टडी को बनाया हथियार
सुंदरी की यह यात्रा आसान नहीं थी. बचपन से ही अधिकारी बनने का सपना देखने वाली सुंदरी ने शुरुआती तैयारी के लिए किसी महंगे कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया, बल्कि घर पर रहकर ही सेल्फ स्टडी की.पहला प्रयास में मुख्य परीक्षा में सफलता नहीं मिली.फिर भी हार नहीं मानी दोगुनी ताकत और नई रणनीति के साथ दोबारा तैयारी में जुट गई.दूसरा प्रयास में प्रारंभिक परीक्षा पास करने के बाद आगे की तैयारी के लिए पटना गई और आखिरकार अपने दूसरे ही प्रयास में सफलता का परचम लहरा दिया.
ग्रामीण बेटियों के लिए बनीं रोल मॉडल
सुंदरी की इस अभूतपूर्व सफलता के बाद बनारपुर गांव सहित पूरे चौसा प्रखंड में जश्न का माहौल है.बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है. ग्रामीणों और शुभचिंतकों का कहना है कि सुंदरी ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या महंगे संसाधनों की मोहताज नहीं होती.आज सुंदरी कुमारी उन हजारों प्रतियोगी छात्रों और खासकर ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली बेटियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन चुकी हैं, जो अभावों के बीच बड़े सपने देखने की हिम्मत रखती हैं.






