बेटियां बोझ नहीं, गौरव हैं: बन्नी गांव की सिब्बा ने BPSC में सफलता पाकर माता-पिता का सपना किया साकार

नेशनल आवाज़ /बक्सर :- राजपुर प्रखंड के बन्नी गांव निवासी सिब्बा कौसर ने बीपीएससी की परीक्षा में सफलता हासिल कर घर सहित पूरे जिले का नाम रोशन किया है. परीक्षा परिणाम घोषित होते ही परिजनों के बीच खुशी का माहौल छा गया. रिजल्ट आने के बाद यह खबर पूरे गांव में तेजी के साथ फैल गयी.सुनते ही समाजसेवी एवं बुद्धिजीवियों ने इनके घर पहुंच कर बधाई देना शुरू कर दिया है. सिब्बा की प्रारंभिक पढ़ाई गांव से हुई इसके बाद बक्सर एमपी हाई स्कूल से पढ़ाई की.उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए पटना हज भवन के तरफ से संचालित शिक्षा केंद्र से पढ़ाई कर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी शुरू किया.
डीएम रमन कुमार बने रॉल मॉडल
सिब्बा ने बताया कि वर्ष 2014 में एमपी हाई स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा पास की थी. इस समय एक कार्यक्रम में पहुंचे तत्कालीन जिलाधिकारी रमन कुमार ने बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया था एवं कई योजनाओं को बारीकी से समझाया था. जिससे प्रेरित होकर इसके अंदर की जगी प्रेरणा ने आगे बढ़ने के लिए हौसला दिया. जिसमें इनके पिता मीर सफीउल्लाह इनकी मां साफीया खातून का काफी अहम योगदान रहा है.
2020 से कर रही थी तैयारी
सिब्बा ने बताया कि वर्ष 2020 से ही परीक्षा की तैयारी में लगे थे. सबसे पसंदीदा विषय इतिहास है. जिस विषय से पढ़कर वह आगे आईएएस बनने का सपना संजो रही है.जिसमें उन्हें पहली सफलता हासिल हुई है.मन में दृढ़ इच्छाशक्ति को लेकर मैंने अपने पढ़ाई को जारी रखा. किसी कोचिंग संस्थान का मैंने सहारा नहीं लिया. लगातार दो वर्षों तक स्वाध्याय कर पढ़ाई कर सफलता पायी है.
किताबों से दोस्ती कर किताबों की दुनिया में खो कर ही बहुत कुछ हासिल किया है.एक अच्छे परीक्षा की तैयारी के लिए घर पर रहकर भी माहौल को बनाया जा सकता है. जिस माहौल को बनाने में परिजनों का सहयोग जरूरी है.
पिता एवं मां से मिली प्रेरणा
अपनी सफलता के बारे में बताया कि वह अपने पांच बहनों में चौथे नंबर पर है.इनसे बड़ी तीन बहनें सरकारी शिक्षक हैं. जबकि उनकी छोटी बहन बीएड कर रही है.इन्होंने बताया कि पिता मीर सफीउल्लाह वर्ष 2001-200 6 तक एवं माता सफिया खातून वर्ष 2006 से 2016 तक इस पंचायत के मुखिया रही हैं.इस दौरान इन लोगों ने पंचायत के विकास के साथ अपने बेटियों को कभी बोझ नहीं समझा.पिता के सपने को पूरा करने के लिए मां की इच्छा थी कि बेटी अधिकारी बने.
पिता ने बताया कि मैं आज बहुत खुश हूं कि मेरी बेटी ने परिवार एवं जिले का नाम रौशन किया है. इसके मन में हमेशा था कि मैं देश एवं देश की महिलाओं के लिए कुछ करुं जिसको लेकर यह हमेशा हमसे चर्चा करती रहती थी. तभी मैंने कहा कि अच्छा करने के लिए कुछ अच्छा करना पड़ता है. अन्य बेटियों को भी पढ़ कर आगे बढ़ने की जरूरत है.सिब्बा कौसर ने परीक्षा की तैयारी करने वाली छात्राओं के लिए कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में कई ऐसी चुनौतियां हैं जो गरीबी या पारिवारिक सपोर्ट के अभाव में बेटियां पढ़ाई छोड़ देती हैं.
लेकिन वह अपनी पढ़ाई जारी रखें.मां-बाप को भी सपोर्ट करने की जरूरत है.मेहनत करने वाले लोगों का नाम निश्चित तौर पर इस सूची में अगली बार दर्ज होगा. वह प्रयास जारी रखें. राजस्व अधिकारी बनने के बाद भी चुनौती एवं सफलता दोनों एक साथ रहेंगे.लेकिन इसे हम स्वीकार करते हुए अपने कर्तव्य को पहले रखेंगे.






