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बेबस माँ की पुकार “कोई मेरे कलेजे के टुकड़े को बचा लो”, जिंदगी और मौत के बीच झूल रही मंगरॉव के गोविंद की सांसें

नेशनल आवाज़ /बक्सर :-  एक माँ के लिए इससे बड़ा पहाड़ जैसा दुख और क्या होगा कि उसका जवान बेटा उसकी आँखों के सामने जिंदगी की भीख मांग रहा हो, और गरीबी के कारण वह बेबस खड़ी आंसू बहाने को मजबूर हो. कुछ ऐसा ही ह्रदय विदारक मंजर जिले के राजपुर प्रखंड अंतर्गत मंगरॉव गांव में देखने को मिल रहा है. 32 वर्षीय युवक गोविंद बारी पिछले कई महीनों से किडनी की गंभीर और जानलेवा बीमारी से जंग लड़ रहा है.

​अतिपिछड़ा और बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले गोविंद के घर का चूल्हा आज अपनों की सिसकियों और आंसुओं से जल रहा है.​गोविंद की माँ चिंता देवी ने रुंधे गले और नम आँखों से अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा

​मेरा बेटा बाहर कमाने गया था ताकि घर की गरीबी दूर कर सके. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. कुछ ही महीनों में वह ऐसी बीमारी लेकर लौटा कि फिर उठ नहीं सका. हर दूसरे दिन उसका डायलिसिस कराना पड़ता है. पति मुन्ना बारी मजदूरी करके किसी तरह दो वक्त की रोटी जुटा पाते हैं, अब इस महंगे इलाज का खर्च कहाँ से लाएं? हम कर्ज के दलदल में पूरी तरह डूब चुके हैं.​फिलहाल गोविंद की पत्नी अस्पताल में उसकी परछाई बनकर दिन-रात उसकी सेवा में जुटी है. इलाज के भारी-भरकम खर्च के आगे अब उम्मीदें दम तोड़ने लगी हैं.​

इस गरीब परिवार पर दुखों का पहाड़ तब और टूट पड़ा जब पिछले तीन सप्ताह से ‘आयुष्मान भारत कार्ड’ ने भी काम करना बंद कर दिया. तकनीकी खराबी या किन्हीं अन्य कारणों से आयुष्मान योजना के तहत मिल रहा मुफ्त इलाज बंद हो गया है. ऐसे में अब हर दूसरे दिन होने वाले डायलिसिस और दवाओं के खर्च ने परिवार की कमर तोड़ कर रख दी है. एक लाचार और बेबस माँ अब हर आने-जाने वाले के सामने झोली फैलाकर अपने बेटे की जिंदगी की गुहार लगा रही है.​इस गंभीर और मानवीय संकट को देखते हुए जब प्रभात ख़बर ने तियरा में आयोजित सहयोग शिविर के दौरान बक्सर की डीडीसी निहारिका छवि से बात की, तो उन्होंने मामले की संवेदनशीलता को समझा. डीडीसी ने इस बेहद गंभीर मुद्दे पर त्वरित विचार करते हुए पीड़ित परिवार को हरसंभव सरकारी सहायता और सहयोग दिलाने का आश्वासन दिया है.​गोविंद सिर्फ एक मरीज नहीं, बल्कि एक बूढ़े बाप का सहारा, एक माँ का लाडला और एक पत्नी का सुहाग है.

गरीबी की वजह से किसी की सांसें थम जाएं, यह इंसानियत पर सबसे बड़ा दाग होगा. प्रशासन अपने स्तर पर प्रयास कर रहा है, लेकिन गोविंद को इस वक्त आपकी, हमारी और हम सबकी फौरी मदद की जरूरत है.​मंगरॉव के इस नौजवान को नया जीवन देने के लिए सक्षम सामाजिक संगठन, जनप्रतिनिधि और सहृदय लोग आगे आएं और अपनी स्वेच्छा से आर्थिक मदद करें. आपकी एक छोटी सी मदद इस बेबस माँ के आंसुओं को पोंछ सकती है.विशेष जानकारी के लिए 8873689014 पर संपर्क कर सकते है. गोविन्द की माँ से बात करने के लिए 7360959269 पर संपर्क करें.

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